आखिर बैरकपुर में अर्जुन का अभिषेक

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२४ घंटा लाइव संवाददाता / राजीव गुप्ता / बैरकपुर / २३ मई २०२२ : वो हिंदी फिल्म का जो गीत  था “भँवरे ने खिलाया फूल – वो ले गया राज कुँवर” सांसद अर्जुन सिंह के तृणमूल में आते ही कई नेताओ का जैसे पूरा पासा ही उल्टा पड़ गया।  कारण २०१९ के मार्च महीने में जब अर्जुन सिंह तृणमूल त्याग कर भाजपा में आये थे और मई महीने में चुनाव जीतकर सांसद बनकर काफी चर्चा में रहे थे।  क्युकी इनके समर्थन में प्रचार करने देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तो बिरोध में राज्य की मुख्य मंत्री ममता बैनर्जी पहुंची थी भाटपाड़ा।  यहाँ तक की तृणमूल के युवा सम्राट अभिषेक बैनर्जी ने भी चैलेंज कर दिया था।  उन सब को करारा जवाब था अर्जुन सिंह का यहाँ से चुनाव जितना।

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इसके बाद लगभग हर छोटे बड़े नेताओँ ने हथियार डाल दिया अर्जुन सिंह के सामने।  लेकिन समय के साथ बहुत कुछ बदलता गया।
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अगले महीने यानी जून २०१९ में ही सुबोध अधिकारी ने बदला पाला, ममता दीदी के उपस्थिति में चले गए तृणमूल में। उसके बाद शुरू हुआ एक एक किला फतह करना। अर्जुन सींह को चुनौती देते हुए कांचरापाड़ा से लेकर टीटागढ़ तक दखल हो चुके सभी पार्टी कार्यलय को पुनः खुलवाया सुबोध ने । जिला स्तर के नेता का पद भी दिया गया सुबोध अधिकारी को।  लेकिन बाद में उन पदों से हटा भी दिया पार्टी ने ।
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हालाँकि बाद में बीजपुर से विधायक बनाया गया।
इसके बाद जिला स्तर पर सुबोध के पर कतरते हुए जिला सभापति बनाया गया पार्थ भौमिक को तथा INTTUC जिला सभापति के पद पर बिठाया गया सोमनाथ श्याम को। इसके साथ ही अर्जुन सिंह की कांटे की टक्कर सुबोध अधिकारी से हटकर शुरू हुई सोमनाथ श्याम के साथ।
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इसके बाद सोमनाथ श्याम ने एक एक कर अर्जुन सिंह के सभी लोगों को तोडना शुरू किया और जोड़ लिया अपने पार्टी तृणमूल में।  नगरपालिका चुनाव के दौरान उनके अधिकतर करीबियों को बैठा दिया या तो तृणमूल का झंडा पकड़ा दिया।
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यहाँ तक की चुनाव के दिन सोमनाथ के एक करीबी तृणमूल उमीदवार मनोज पण्डे ने तो सांसद को भद्दे भद्दे गलियों से भर दिया था।  यहाँ तक की सांसद के साथ हाथ पाई पर भी उतारू हो गए थे।
जब अर्जुन सिंह से भिड़ गए तृणमूल विधायक
सभी को लग रहा था की अर्जुन से हटा कर लोग मजदुर भवन को कमजोर बना रहे हैं।  लेकिन शायद मुकुल राय का फार्मूला किसी को याद नहीं रहा, जबकि अर्जुन सिंह ने उसी फॉर्मूले को शयद अपनाना बेहतर समझा।
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अंत में कल २२ मई को इन सभी अटकलों में बिराम लग गया।  जिसे संसद कल तक भाईपो कहते नहीं थकते थे उसी के हाथों तृणमूल में शामिल जो गए।  जिन बिधायकों ने अर्जुन को बंगाल से खदेड़ने की बात कही थी उन सभी लोगो ने कल उसी अर्जुन सींह को उत्तरीय व फूलों से पार्टी में स्वागत किया।
परन्तु कल के पुरे वाकये के दौरान कुछ तस्वीरें काफी सवाल भी उत्पन्न कर रहीं है। लग रहा जैसे आने वाले दिनों में तृणमूल के ही कुछ लोगों से अर्जुन की खास बनने वाली नहीं है।  अब आगे देखना है क्या रहता है यहाँ का दृश्य।
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लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा की जिन नेताओं ने छल कपट हो या लड़ाई करके यहाँ अर्जुन सिंह को पीछे ढ़केल कर तृणमूल को मजबूत किया, लेकिन आज उन्ही सभी नेताओं पर भरी पड़ गया अर्जुन सिंह का ये नया ट्रम्प कार्ड।

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